Friday, December 7, 2018

وفد حكومي يمني يتوجه للسويد للمشاركة في مشاورات السلام

غادر وفد حكومي يمني، صباح الأربعاء، العاصمة السعودية الرياض متوجها إلى السويد، حيث سيشارك في مشاورات السلام مع الانقلابيين الحوثيين برعاية الأمم المتحدة، بحسب ما قال مصدران قريبان من الوفد لوكالة "فرانس برس".
ويترأس الوفد اليمني الحكومي، الذي يضم 12 شخصا، وزير الخارجية خالد اليماني، وفقا لمصدر قريب من الوفد، في وقت لم تعلن الأمم المتحدة بعد رسميا عن موعد لبدء هذه المحادثات.
وكتب مدير مكتب رئاسة الجمهورية، عبدالله العليمي، على موقع التواصل الاجتماعي "تويتر": "يغادر الوفد محملا بآمال الشعب اليمني".
وأضاف في التغريدة أن الوفد الحكومي "سيبذل كل الجهود لإنجاح المشاورات التي نعتبرها فرصة حقيقية للسلام".
وفي وقت سابق، أقلعت طائرة تقل وفدا يمثل ميليشيات الحوثي المتمردة، متجهة من العاصمة اليمنية صنعاء إلى السويد، لحضور محادثات السلام.
ورافق مبعوث الأمم المتحدة الخاص لليمن، مارتن غريفيث، الوفد، على متن الطائرة المقدمة من حكومة الكويت.
وكانت طائرة تابعة للأمم المتحدة نقلت، الاثنين، زهاء 50 مصابا من المتمردين الموالين لإيران، من صنعاء إلى العاصمة العمانية مسقط.
وفي سبتمبر الماضي، فشلت الأمم المتحدة في عقد جولة محادثات في جنيف، بسبب تعنت ميليشيات الحوثي التي دأبت على المراوغة والالتفاف على تعهداتها.
ويأمل المجتمع الدولي أن تحقق محادثات السويد اختراقا للأزمة اليمنية وفق قرار مجلس الأمن الدولي رقم 2216 الذي قدم خارطة طريق قابلة للتطبيق.
وينص القرار الذي صدر في أبريل 2015، على انسحاب المتمردين من المدن التي سيطروا عليها منذ العام 2014 وأبرزها صنعاء، وتسليم الأسلحة الثقيلة.
أعلنت اكثر من 80 نقابة عمالية في أنحاء العالم دعمها لاحتجاجات عمال الأحواز التي دخلت يومها الخامس والعشرون بسبب تردي الأوضاع المعيشية وعدم صرف الرواتب.
ودعت عشرات النقابات في فرنسا وإيطاليا والبرازيل وإسبانيا وإندونيسيا وهايتي والسنغال ومصر وباراغواي والسلطة الفلسطينية وعدة بلدان أخرى، المرشد الإيراني علي خامنئي بتلبية مطالب العمال وإطلاق سراح عمال قصب السكر لمدينة السوس في محافظة خوزستان بالأحواز التي اعتقلتهم السلطات الإيرانية خلال الأيام والأسابيع الماضية.
وقال بيان مشترك: "تصل باستمرار أنباء مقلقة من إيران في الأسابيع الأخيرة بشأن المضايقات التي يتعرض لها العمال النقابيين والمعلمين في احتجاجاتهم السلمية المستمرة ضد الغلاء وعدم دفع الرواتب".
وتواصلت الاحتجاجات العمالية لمصنع الصلب في الأحواز، إعتراضا على عدم دفع رواتبهم ومستحقاتهم منذ عدة شهور.
وهتف العمال ضد المسؤولين الإيرانيين واتهموهم باللامبالاة تجاه وضعهم المعيشي المتردي، وأوعز المحتجون سبب تردي الأوضاع المعيشية في إيران إلى تدخلات إيران في المنطقة خاصة في فلسطين وسوريا.
وصب المحتجون جام غضبهم على حكومة "حسن روحاني" ووصفوه بالكذاب والمخادع، حيث هتف المتظاهرون "نصر من الله وفتح قريب، والموت لهذه الحكومة المخادعة"، وذلك بسبب عدم وفاء روحاني بوعوده التي قطعها في حملته الانتخابية في معالجة الأوضاع الاقتصادية والمعيشية ومحاربة الفقر الواسع والفساد المتفشي في الدوائر الحكومية.
وانضمت إلى الاحتجاجات مدن جديدة في الأحواز مثل الفلاحية والقنيطرة (دزفول)، وشرائح أخرى تطالب باسترجاع أموالهم التي نهبتها بعض البنوك والمؤسسات الاستثمارية الحكومية، خاصة التابعة للحرس الثوري الإيراني.
و اشتبكت مليشيات الباسيج مع طلاب جامعة "بلي تكنيك" في طهران، بعد أن نظم الطلاب مظاهرات تضامنية مع المعلمين والعمال المعتقلين في السجون الايرانية.
كما خرجت مظاهرات إحتجاجية لعمال وموظفي مستشفى الخميني في مدينة "كرج"، للمطالبة بدفع رواتبهم المتأخرة منذ عدة شهور، فيما نظم محتجون مظاهرات أخرى في طهران أمام مؤسسة "كاسبين" المصرفية التابعة للحرس الثوري الإيراني، وهي إحدى أكبر الشركات المتهمة بنهب أموال المواطنين خلال السنوات الماضية.
ويتهم الإيرانيون تلك المؤسسات بإنفاق أموال الشعب على المليشيات التابعة للحرس الثوري في المنطقة العربية، خاصة الحوثيين في اليمن، وحزب الله الإيراني في لبنان، في إطار سياسة طهران التوسعية.

Tuesday, November 6, 2018

शिवराज के शासन में कौड़ी के भाव लहसुन, तबाह होते किसान

लिनाय प्रांत से मौजूदा कांग्रेस में डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य राजा कृष्णमूर्ति भी फिर से मैदान में हैं, जहां उनके प्रतिद्वंदी रिपब्लिकन पार्टी के भारतीय मूल के ही जीतेंद्र दिगांकर हैं. इन सभी डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों के जीतने की अच्छी संभवनाएं हैं.
इसके अलावा भारतीय मूल के अमरीकी स्री प्रेस्टन कुलकर्णी ने अमरीकी विदेश सेवा की नौकरी छोड़कर राजनीति में प्रवेश किया और अब वो टेक्सस से कांग्रेस के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार की हैसियत से चुनाव लड़ रहे हैं.
फ़्लोरिडा में संजय पटेल डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार हैं जो मौजूदा कांग्रेस सदस्य बिल पोसी के ख़िलाफ़ मैदान में हैं. कनेक्टीकट प्रांत में एक मात्र भारतीय मूल के रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार हैरी अरोड़ा डेमोक्रैट जिम हाइम्स के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं, लेकिन डेमोक्रेटिक उम्मीदवार इस सीट से पिछले 10 साल से चुनाव जीत रहे हैं.
हैरी अरोड़ा को फिर भी उम्मीद है कि वोटर अब उनको भी मौक़ा दे सकते हैं. हैरी अरोड़ा कहते हैं, "मुझे तो सभी तरह के लोग समर्थन दे रहे हैं. हमारे क्षेत्र में अधिकतर लोग चाहते हैं कि उनके मुद्दों को सुलझाने के लिए काम किया जाए न कि बस टालमटोल करके बात इधर की उधर कर दी जाए. मेरा तरीक़ा यह है कि कैसे मामले सुलझाए जाएं, उसके बारे में पूरी योजना सामने रखें न कि सिर्फ़ उन पर बात करके आगे बढ़ जाएं."
एक मात्र भारतीय मूल के आज़ाद उम्मीदवार शिवा अय्यादुराई भी सीनेट की सीट के लिए मैसाचुसेट्स प्रांत में चुनावी मैदान में हैं और उनके सामने हैं डेमोक्रेटिक पार्टी की दिग्गज नेता और मौजूदा सीनेटेर एलीज़ाबेथ वॉरेन.
अब ऐसे में शिवा अय्यादुराई के जीतने की कोई संभावना नज़र नहीं आती. उम्मीद की जा रही है कि एलीज़ाबेथ वॉरेन सन 2020 में डेमोक्रेटिक पार्टी की राष्ट्रपति पद के चुनाव में उम्मीदवार हो सकती हैं. अमरीकी कांग्रेस के चुनाव के अलावा भारतीय मूल के दर्जनों लोग प्रांतीय और स्थानीय चुनावों में भी भाग ले रहे हैं.
मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों ये ख़ास प्रयोग हो रहे हैं.
यहां सियासत में खुद को सफल बनाने और जनता से जुड़े रहने के लिए राजघरानों और ज़मींदारों की नई पीढ़ी नए-नए तरीके आजमा रही है.
मध्य प्रदेश की राजनीति की गहरी समझ रखने वाले पत्रकार दीपक तिवारी कहते हैं कि अंग्रेज़ चले गए लेकिन हिंदुस्तान में राजे-रजवाड़े रह गए.
वो कहते हैं, "देसी रियासतों के भारत में विलय के बाद कई राज परिवारों ने लोकतंत्र के जरिए जनता पर शासन करने की नीति पर काम किया और काफ़ी हद तक इसमें सफल भी रहे."
ख़ास तौर पर मध्य प्रदेश में राज परिवारों, जागीरदारों और ज़मींदारों को ख़ूब चुनावी सफलता मिली.
दीपक तिवारी बताते हैं कि इमरजेंसी के बाद भाजपा ने कांग्रेस के ख़िलाफ़ ज़मीन तैयार करने के लिए राजघरानों को राजनीति में बहुत अवसर दिए. कांग्रेस ने भी ऐसा ही किया. यही वजह रही कि सिंधिया परिवार लगातार प्रदेश की राजनीति का केंद्र रहा तो चुरहट के अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री बने.
फिर राघोगढ़ के राजपरिवार से आए दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे. इनके अलावा गोविंद नारायण सिंह और राजा नरेशचंद्र सिंह भी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे.
आज भी मध्य प्रदेश में राज परिवारों से जुड़े दो सांसद और कई विधायक हैं.
विंध्य और बुंदेलखंड इलाके में अभी भी सियासत राजपरिवारों और ज़मींदारों के इर्द-गिर्द ही घूमती है.
वरिष्ठ पत्रकार विनय द्विवेदी नामी परिवारों के राजनीति में आने की वजह बताते हैं.
वो कहते हैं, "ग्वालियर, राघोगढ़, रीवा, नरसिंहगढ़, चुरहट, खिचलीपुर, देवास, दतिया, छतरपुर, देवास और पन्ना जैसे छोटे-बड़े राजघराने मध्य प्रदेश प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे और सफल भी."
उन्होंने कहा, ''दरअसल आज़ादी के बाद लोकतंत्र में भी ये राज परिवार सरकार द्वारा मिली संपत्तियों से धनी ही बने रहे. इसके साथ ही अपने अपने क्षेत्र में प्रभाव के चलते बड़ी संख्या में आम लोगों का जुड़ाव इनसे रहा. इसी का इस्तेमाल करते हुए इन परिवारों ने राजनीति में जब भी कदम रखा तो ज़्यादातर सफल ही हुए."देलखंड के युवा पत्रकार कृष्णकांत नगाइच कहते हैं, "हमने राजशाही का बीता दौर तो नहीं देखा लेकिन आज भी ग्रामीण क्षेत्र की जनता इन परिवारों के लोगों के लिए राजा साहब, महाराज, हुकुम, कुंवर सा और रानी सा जैसे सम्बोधनों का इस्तेमाल करती है."
लेकिन ज़माना बदला भी है. ख़ास तौर पर बीते एक दशक में मोबाइल क्रांति से ग्रामीण क्षेत्र की जनता में जागरूकता आई है. अब यही जनता इन राजपरिवारों को सियासत में तो देखना चाहती है लेकिन आम नेता की तरह.
सामाजिक कार्यकर्ता सचिन जैन का मानना है कि लोकतंत्र में आए इस बदलाव में ख़ास तौर पर युवा हैं. वो कहते हैं, ''युवा चाहते हैं कि अगर कोई राज परिवार या पुराने ज़मींदार परिवार से है तो भी वह सामान्य राजनैतिक व्यक्ति की तरह जनता से मिले न कि अपने इतिहास की वजह से.''

Tuesday, October 2, 2018

中国公众是否真的关注气候变化

国刚刚经历了一个“多事之夏”: 创纪录的热浪、致命的山洪和台风。气候变化的影响无论城乡都能感到,而且引发了公众对探讨气候变化的更大兴趣。但这种好奇心的爆发是不是昙花一现?换句话说,中国人民是否真的关注气候变化?

这个问题的答案是肯定的。中国政府在努力确立自身应对全球变暖的国际领袖地位,而最近的调查表明公众也都支持政府的行动。2017年的一项全国调查 中,94.4%的受访者认为气候变化正在发生,66%认为这主要是由人类活动造成的。中国气候传播项目中心和绿色创新发展中心分别在2017年和2018年就这一主题进行了一次调查,调查结果均表明中国人对气候变化的态度是由政府主导的高调行动和公众对于空气污染的关切推动的。

政府的主导作用

2009年哥本哈根气候峰会之后,由于此次峰会上达成约束性国际气候协议的希望破灭,再加上空气污染等国内环境问题也变得更加迫切,中国开始实施一系列国家政策和行动将经济增长与温室气体排放脱钩。

政府主导的促进节能、推动低碳发展与生活方式的行动在媒体上广泛宣传。中国在2015年达成巴黎气候协定过程中发挥的积极作用在国内也是一个受到高度赞扬的政治举动。

所以,当被问及谁应该在解决气候变化中发挥更大作用时,绿色创新发展中心调查的受访者压倒性地回答“政府”也就不足为奇了。在从1到5的打分中,政府以4.11分位居榜首,接下来是环境团体、个人和企业。

根据绿色创新发展中心的调查结果,与政府保持一致的思维方式也确保了公众对政府限制温室气体排放(97%)和继续参与巴黎协定(94%)的大力支持。但是,在对这些反馈进行分析时有一点必须铭记:公众对被问的内容未必完全确切了解。比如,资深科学报道记者贾鹤鹏指出,人们可能很难区分碳减排目标 绿色创新发展中心的调查也请中国受访者对他们最可能采取的气候变化应对措施进行排名。尽管中国公众都能接受公交通勤和垃圾分类等简单措施,但对购买低排放汽车和改变膳食结构等生活方式变化的热情则要低得多。 但如果是用钱包来投票,中国公众则很乐于花钱抵消碳排放,有超过一半的受访者情愿每年在这方面花费100元(15美元)以上。这与之前的调查结果中国公众气候变化与传播认知状况调查报告2017”是中国气候传播项目中心于2017年进行的计算机辅助电话调查。受访者共4025人,来自336个城市,年龄18-70岁,通过手机(84.6%)和座机(15.4%)接受调查。

“低碳城市公众认知调查”由中国智库绿色创新发展中心于2018年进行,是中国“城市低碳发展指数研究”项目的一部分。该项目对115个中国城市的表现进行评级。在排名前20的城市中选取2000名居民作为调查对象,其中18-55岁的受访者接受了网上调查,56-70岁的受访者接受了线下调查。一致,即中国消费者愿意花更多的钱购买可再生来源的电力,这意味着在中国,利用消费者不断增长的购买力来开展低碳行动有较大的空间。和碳强度目标(后者指单位国内生产总值的碳排放量)。

字面上看起来差不多的政策会产生截然不同的社会经济影响。绿色创新发展中心关于公众对低碳城市认知的调查印证了公众对气候政策的“一知半解”:83%的受访者表示他们“知道”低碳概念,但只有29%的人足够自信地说他们对此“非常了解”。

与空气污染的联系

在公众眼中,气候变化与空气污染密切相关。根据中国气候传播项目中心的调查,72.6%的受访者认为二者存在关联。受访者们还说,不断恶化的空气质量是他们最担忧的气候风险,接下来是疾病、干旱、洪水、冰川融化、饥馑和粮食短缺等增加的风险。这种观念可能来自公众对中国依靠煤炭作为主要能源的认识,以及对空气污染相关健康风险的高度关切。

在绿色创新发展中心的调查中,空气质量被视为城市低碳发展最重要的一个方面,超过了公共交通、耗水程度和废物处理。北京和广州等较大城市的居民对于现状的满意度最低。

Wednesday, September 19, 2018

एशिया कपः भारत-पाकिस्तान मुक़ाबले का यादगार इतिहास

भारत पाकिस्तान मैच हमेशा क्रिकेट प्रशंसकों के लिए ख़ास होता है और जब दुबई या शारजाह में खेला जा रहा हो, तब तो ये थ्रिलर मैच हो जाता है. भारत पाकिस्तान मैच का भारतीयों के लिए मतलब होता है कि या तो भारत जीता या भारत हारा क्योंकि वो ये कहना नहीं चाहते कि पाकिस्तान मैच जीत गया.
पाकिस्तान में भी ऐसा ही है. इसी से पता चलता है कि भारत-पाकिस्तान मैच की क्या ख़ासियत है.
1947 में दोनों देशों के बंटवारे के बाद भारत और पाकिस्तान ने न केवल सीमाओं पर बल्कि स्टेडियम में भी तनाव महसूस किया है. चाहे क्रिकेट हो, हॉकी या कबड्डी, अगर भारत और पाकिस्तान के बीच खेला जा रहा है तो दोनों देशों के प्रशंसकों में भारी उत्साह होता है.
अब एक और मैच में भारत और पाकिस्तान की टीमें एक दूसरे का सामना करने जा रही हैं. दोनों टीमें दुबई में 19 सितंबर यानी बुधवार को एकदिवसीय मैच खेलेंगे जहां एशिया कप 2018 खेला जा रहा है.
2008 में मुंबई में आतंकवादी हमलों के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच कोई द्विपक्षीय क्रिकेट श्रृंखला नहीं हुई है. हालांकि उन्होंने एक-दूसरे के ख़िलाफ़ अन्य देशों में कुछ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट में मैच खेले हैं.
पिछले साल इंग्लैंड में खेली गई आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में भारत और पाकिस्तान के बीच दो बार मैच हुआ. लीग मैच में भारत ने 124 रनों के साथ जीत हासिल की लेकिन इससे अधिक महत्वपूर्ण फ़ाइनल मैच में भारत 180 रनों से हार गया.
पिछले 11 सालों में दोनों टीमों ने एक-दूसरे के ख़िलाफ़ केवल आठ टी20 मैच खेले हैं. और आखिरी बार 2016 टी20 वर्ल्ड कप में दोनों टीमें आपस में भिड़ी थीं.
दोनों के बीच 2007 के बाद से कोई टेस्ट मैच नहीं खेला गया क्योंकि टेस्ट मैच में कोई वर्ल्ड कप या अंतरराष्ट्रीय सिरीज़ नहीं होती है.
अब जब पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर इमरान ख़ान वहां प्रधानमंत्री बन गए हैं तो क्रिकेट प्रशंसकों में एक उम्मीद जगी है कि दोनों देशों के बीच क्रिकेट को लेकर रिश्ते सुधरेंगे लेकिन उन्हें थोड़ा इंतज़ार करना पड़ेगा.मरान ख़ान की कप्तानी में पाकिस्तान ने भारत के ख़िलाफ़ कई यादगार मैच खेले हैं और दोनों में कड़ा मुक़ाबला रहा है.
1983-84 में पहले एशिया कप से लेकर अब तक दोनों टीमों के बीच इस टूर्नामेंट में 11 मैच खेले गए थे और दोनों में से कोई टीम भारी पड़ती नहीं दिख रही थी क्योंकि दोनों टीमों ने 5-5 मैच जीते और एक ड्रॉ रहा.
हालांकि भारत थोड़ा आगे है क्योंकि उसने चार एशिया कप टूर्नामेंट जीते हैं और पाकिस्तान ने दो. जो एशिया कप पाकिस्तान ने जीते, दोनों बार वो एशिया कप बांग्लादेश में खेले गए थे.
लेकिन नतीजों के हिसाब से कुल मिलाकर दोनों देश लगभग बराबरी पर हैं. एशिया कप में भारत की सफलता का दर 61.90 फ़ीसदी है और पाकिस्तान की सफलता दर 62.50 फ़ीसदी है.
भारत-पाकिस्तान मैचों के इतिहास में, शारजाह का एक विशेष स्थान है. ऐसा कहा जाता था कि शुक्रवार के दिन शारजाह में हो रहे मैच में पाकिस्तान टीम को हराना किसी भी टीम के लिए मुश्किल है और यहां तक कि भारत के लिए भी जीतना मुश्किल होता.
ऐसा ही एक शुक्रवार, अप्रैल 1986 का था जब मैच में भारतीय टीम ने 245 रन बनाए. ये वो दिन थे जब 225 से ऊपर का स्कोर किसी टीम को भी जीता सकता था.
सुनील गावस्कर के 92 रनों के चलते भारत मजबूत स्थिति में पहुंच गया था. रनों को पीछा करते हुए पाकिस्तान टीम ने 206 रनों के स्कोर पर 6 विकेट खो दिए थे लेकिन जावेद मियांदाद अभी भी मैदान में थे.
मैच का अंतिम ओवर आने तक भारतीय कप्तान कपिल देव के सभी दस ओवर खत्म हो चुके थे. मदन लाल और मनिंदर सिंह की भी गेंदबाज़ी ख़त्म हो चुकी थी और सिर्फ़ रवि शास्त्री ही बचे थे.
रवि शास्त्री के बजाय चेतन शर्मा को आखिरी ओवर डालने का मौका दिया गया.
पाकिस्तान को जीतने के लिए चार रन चाहिए थे. लेकिन जावेद मियांदाद ने चेतन शर्मा की गेंद पर बल्ले को हवा में उठाया और पेविलियन की तरफ़ भागने लगे.
मियांदाद का वो छक्का आज भी भारतीय प्रशंसकों को याद है.
भारत ने मियांदाद के उस छक्के का बदला 1997 में कराची में लिया. भारत 266 रनों के स्कोर का पीछा कर रहा था.
विनोद कांबली मज़बूती से मैदान में डटे थे और भारत की बल्लेबाज़ी बढ़िया चल रही थी.
लेकिन सभी के लिए हैरानी का पल रहा जब स्पिनर सक़लैन मुश्ताक़ की गेंद पर छक्का लगा कर भारत को जीत दिलाई.
यह 1996 का विश्व कप क्वार्टर फ़ाइनल था और बैंगलोर के एम चिन्नासामी स्टेडियम के मैदान पर दोनों टीमें सेमीफ़ाइनल में जाने के लिए मुक़ाबला कर रही थीं.
पाकिस्तानी टीम भारत में खेली हुई सभी टीमों की तुलना में काफ़ी मज़बूत थी.
भारतीय बल्लेबाज़ी संघर्षरत थी. आखिरी कुछ ओवर ही बचे थे और 250 रनों तक ही पहुंचने की उम्मीद थी. लेकिन अजय जडेजा के पिच पर आते ही बाज़ी पलट गई.
जडेजा ने आखिरी 3-4 ओवर्स में 25 गेंदों पर 45 रन बना डाले. उन्होंने वक़ार यूनुस के ओवर में 22 रन बना लिए और भारत का स्कोर 287 पर पहुंच गया.
इसके बाद पाकिस्तान के आमिर सोहेल ने आक्रामक बल्लेबाज़ी करते हुए स्कोर का पीछा करना शुरू किया. वेंकेटेश प्रसाद के ओवर में उन्होंने कई चौके लगाए और वेंकेटेश प्रसाद को कई बार पेवेलियन की तरफ़ इशारा भी किया लेकिन अगले ही ओवर में उन्हें आउट कर दिया. प्रशंसकों में मैच के लिए उत्साह देखते ही बनता था.
ये वही मैच था जिसमें जावेद मियांदाद रन आउट हुए थे, जबकि मियांदाद विकेटों के बीच तेज़ भागने के लिए जाने जाते थे.
यह वो वक्त था जब एक दिवसीय मैच लोकप्रिय हो रहे थे और उन दिनों भारत-पाकिस्तान एक दिवसीय श्रृंखला खेल रहे थे. नवंबर 1978 में पाकिस्तान को उसी की सरज़मीं पर साहिवाल स्टेडियम में मैच जीतने के लिए 22 रनों की ज़रूरत थी और सिर्फ़ दो विकेट बचे थे.
अंशुमन गायकवाड़ और गुंडप्पा विश्वनाथ मज़बूती से भारत के लिए बल्लेबाज़ी कर रहे थे लेकिन दबाव में पाकिस्तान के गेंदबाज़ इमरान ख़ान और सरफराज़ नवाज़ ने बाउंसर फेंकने शुरू किये.

Tuesday, September 11, 2018

过渡捕捞危及英国海洋

英国一慈善机构—海洋环境保护协会发表了一份名为《寂静的海洋》的报告,该报告是在英国政府为议会就海洋议题作立案准备时发布的。《卫报》引该报告说,严重的过度捕捞是英国目前面临的最大的环境威胁,它同时可能对海洋生态系统产生巨大破坏。

该组织致力于保护海洋、海岸和野生动物。它敦促政府在渔业管理方面应考虑到生态系统的状况。它认为,配额制导致渔民过度捕捞。为了鼓励鱼类资源的可再生性,部分海域应暂时关闭。

这份报告说,英国海洋中的鱼类由于鱼苗被过早捕捉,鱼在种类和数量上都日益减少。47个产鱼的不列颠诸岛中仅有8个海域保持着鱼群的健康状态。
 
 
该组织的主席查尔斯王子说英国海洋迫切需要关注,该报告起到了“唤醒”作用。没有任何一个英国海域受到了有效保护,从而免受人为危害;而海洋动物需要保护的程度也从没有这样迫切过。
在最新一期《自然地球科学》上发表的一篇日本研究说,气候模型表明,在未来几年持续升高的气温将使泥炭地干涸,后者将释放更多的二氧化碳,从而使全球变暖加剧。


泥炭是植被在极潮湿的环境下腐蚀而累积形成的。它约占2 %的全球陆地面积。由于碳在低温和水淹的情况下几乎不能分解,泥炭地中储存了大量的碳。

日本科学家通过模型分析发现,在泥炭地稠密的加拿大、俄罗斯和阿拉斯加等地区和国家,泥炭层将由于全球气温上升而加快干枯并释放出更多的二氧化碳。

日本海洋地球科学和技术研究所的山岸伊勢说,气温每上4 摄氏度就会释放浅泥炭层中的40 %和深泥炭层中的86 %的碳。这就意味着大气中的二氧化碳浓度将会增加,从而进一步加剧全球气候变暖。
据《路透社》报道,中国东南沿海浙江省的台州市居民最近进行了抵制PX石化项目建设的游行。他们担心,该厂的建设将威胁他们的健康,并呼吁政府放弃该计划并先考虑环境,后考虑发展。


该报引《台州日报》报道说,该市准备建设二甲苯(简称PX)的炼化工厂。这将是一个耗资600亿元 88亿美元)的石油加工项目的一部分。

台州市居民通过发送短信和使用互联网组织进行抗议性集体“散步”。当地一网站说:“作为台州市的居民,每个人都应采取行动,坚决反对PX项目。我们要的是清澈的水和绿色的山,而不是有毒的现金。”

该市政府官员准备批准该厂的建设,目的是吸引新投资和保证市政收入。去年,另一个沿海城市—厦门也曾抗议酶项目,导致地方政府放弃该计划

Saturday, September 1, 2018

民间应对禽流感的高招

永远不要低估中国人民的创意和决心,尤其是在应对重大疫情的时候。
尽管世界卫生组织近期表示,仍然无法明确 禽流感的传播方式和危险程度,中国近期爆发的禽流感疫情至今已有过百确诊病例,其中21人死亡。
 
出于对禽流感的恐惧,中国民众在防治禽流感的时候,可是想尽了一切办法。
 
为了使自己饲养的1800多只鸡免受禽流感之苦,浙江省的一位养殖户在鸡饲料里添加了板蓝根。
 
板蓝根是一味中药,在中国历来用于伤寒感冒的治疗。早在2003年非典爆发之时,板蓝根就几乎成了官方推荐的预防药物。2003年的非典疫情首现于中国,最终在全球范围内导致逾800患者死亡。
 
尽管其后研究表明,板蓝根对非典的预防功效被严重高估。然而,经过非典一疫中专家学者的大肆宣传后,板蓝根在民众心中自然而然地成为了能治百病的良药。
 
浙江养殖户余晓强在接受《钱江晚报》采访时,谈到了自己用板蓝根喂鸡的初衷。他说:“既然人吃了有用,鸡吃了应该也有效吧。”
 
同样迷信板蓝根预防禽流感功效的大有人在。据现代快报报道,苏州动物园为了园内饲养的几百只鸟类动物免受禽流感的死亡威胁,近期也开始在饲料中添加板蓝根。
 
据动物园的一位管理人员介绍,他们早在邻近的上海市通报第一例禽流感确证病例的时候,便开始了这项尝试,目前看来“至少还要喂半个月,到时候根据形势再决定要不要继续”。
 
受到禽流感影响而膳食结构发生变化的,不仅仅是动物园里的鸟类。动物园的老虎、狮子等肉食猛兽近来也不得不改换口味,停吃活鸡改吃牛肉。
 
猛兽们的膳食结构变化,并非全因动物园对禽流感的恐惧而采取的防范于未然的防疫措施。事实上,自禽流感疫情爆发始,活禽已不易买到。为防控禽流感,上海市屠宰了活禽11万羽并关闭了当地的活禽交易市场,苏州、南京、杭州等数十个华东城市也随后扑杀鸡鸭关闭活禽交易。
 
南京市不久前勒令当地居民在限期内宰杀饲养的家禽家畜,甚至连平日忙于追逐小摊小贩的城管,近期也不得不苦练屠宰术,给有需要的市民提供上门屠宰鸡鸭的服务。此外,上海和杭州的部分学校也悄然撤下了校园午餐中含鸡肉的菜品。
 
相比国内一窝蜂似的防疫措施,世界卫生组织显得尤为淡定。据半岛电视台报道,世界卫生组织驻华代表蓝睿明在接受采访时表示:“目前,我们只有零星的(禽流感)个案,也许以后也是这样。所以,现在还不是过度反应或者着急的时候。”
 
然而,由于禽流感的死亡人数已逾20人,许多民众都开始积极防疫。也许,正如北京市场里一位卖鸽子的档主所说,防治禽流感是“生死攸关的事情”。

Tuesday, August 28, 2018

पंडरकवड़ा से निकलकर यवतमाल ज़िला मुख्यालय के कलेक्ट्रे

डरकवड़ा से निकलकर यवतमाल ज़िला मुख्यालय के कलेक्ट्रेट दफ़्तर में हम अब तक इकट्ठा हुए सवालों के जवाब ढूंढने पहुंचे. यहां पदस्त रेसीडेंट डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर नरेंद्र फुलझले शिवाजी महाराज के नाम पर शुरू की गयी कर्ज़ माफ़ी योजना के ठीक से लागू न किए जाने के बारे में पूछने पर ‘बलिराजा चेतना अभियान’ और ‘प्रेरणा प्रकल्प’ नामक दो नई सरकारी योजनाओं का ज़िक्र करते हैं.
यह दो नई योजनाएं महाराष्ट्र सकार ने किसान कल्याण को बढ़ाने और आत्महत्याओं को रोकने के लिए शुरू की है. यहां किसानों में डिस्ट्रेस तो है. यह तनाव कभी आर्थिक होता है, कभी सामाजिक तो कभी भावनात्मक. यहां के लोग बहुत भावुक भी हैं. मैं यहीं का रहने वाला हूँ इसलिए मैं जानता हूँ कि यहां लोग ज़रा ज़रा सी बातों को दिल पर ले लेते हैं. बाक़ी अगर परिवार बढ़ता रहे और ज़मीन उतनी ही रहे तो मुश्किल तो होगी ही”.
आगे न्यूनतम समर्थन मूल्य के किसानों तक न पहुँच पाने के सवाल पर उन्होंने कहा, “किसी भी व्यापार की तरह खेती में भी अगर एक हज़ार का निवेश हो तो आदमी कम से कम 1100 रुपये कमाने की कोशिश करेगा. यह छोटा सा मुनाफ़ा भी आज किसानों को नहीं हो रहा. यह आत्महत्याओं के पीछे बड़ी वजह है. बाक़ी सरकार अपनी तरफ़ से सारे प्रयास कर रही है. कर्ज़ा माफ़ी और पानी के संचयन से लेकर किसानों की मानसिक स्थिति को सुधारने पर भी ध्यान दिया जा रहा है”. ज़िला अधिकारी के दफ़्तर से कुछ ही दूरी पर हमारी मुलाक़ात ‘प्रेरणा प्रकल्प’ योजना के तहत किसानों की मानसिक स्थिति पर काम करने वाले मनोचिकित्सक सरफ़राज सौदागर से होती है.
सरफ़राज बताते हैं कि इस योजना का मक़सद महराष्ट्र में हो बढ़ रही किसान आत्महत्याओं को रोकने के लिए मनोचिकित्सकीय हस्तक्षेप करने का है. बीते 2 सालों में हमने यवतमाल और ओसमनीयबाद – जो कि किसान आत्महत्या के मामले में हाई रिस्क जिले माने जाते हैं- यहां 3350 किसानों का इलाज किया है.
इलाज ख़त्म होने के बाद किसी ने भी सुसाइड करने की कोशिश नहीं की. वरना आम तौर पर ऐसे मामलों में ‘रीपीट अटेम्प्ट’ का ख़तरा बहुत रहता है. हमारा काम डिप्रेशन का शिकार किसानों को ढूँढना और इलाज के ज़रिए उन्हें ज़िंदगी के प्रति फिर आशान्वित करना है”.
सरफ़राज अपना यह काम आशा और ट्रेन किए गए अपनी टीम के सदस्यों के साथ मिलकर करते हैं. लेकिन क़र्ज़ की परेशानी दूर करने का उनके पास भी कोई उपाय नहीं.
“हम उन्हें सुसाइड करने की बजाय संघर्ष करके क़र्ज़ माफ़ करवाने और वापस अपने पैरों पर खड़े होने के लिए तैयार करने की कोशिश करते हैं”.